श्री शनैश्चर सहस्रनामावली
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श्री शनैश्चर सहस्रनामावली (प्रारम्भिक नाम)
ॐ अमिताभाषिणे नमः । ॐ अघहराय नमः । ॐ अशेषदुरितापहाय नमः । ॐ अघोररूपाय नमः । ॐ अतिदीर्घकायाय नमः । ॐ अशेषभयानकाय नमः । ॐ अनन्ताय नमः । ॐ अन्नदात्रे नमः । ॐ अश्वत्थमूलजपप्रियाय नमः । ॐ अतिसम्पत्प्रदाय नमः । ॐ अमोघाय नमः । ॐ अन्यस्तुत्याप्रकोपिताय नमः । ॐ अपराजिताय नमः । ॐ अद्वितीयाय नमः । ॐ अतितेजसे नमः । ॐ अभयप्रदाय नमः । ॐ अष्टमस्थाय नमः । ॐ अञ्जननिभाय नमः । ॐ अखिलात्मने नमः । ॐ अर्कनन्दनाय नमः । ॐ अतिदारुणाय नमः । ॐ अक्षोभ्याय नमः । ॐ अप्सरोभिः प्रपूजिताय नमः । ॐ अभीष्टफलदाय नमः । ॐ अरिष्टमथनाय नमः । ॐ अमरपूजिताय नमः । ॐ अनुग्राह्याय नमः । ॐ अप्रमेयपराक्रमविभीषणाय नमः । ॐ असाध्ययोगाय नमः । ॐ अखिलदोषघ्नाय नमः । ॐ अपराकृताय नमः । ॐ अचलाय नमः । ॐ अतिकायाय नमः । ॐ अशेषभयनाशनाय नमः । ॐ अखण्डिताय नमः । ॐ अक्षयफलदाय नमः । ॐ अतीन्द्रियाय नमः । ॐ अमरेश्वरपूजिताय नमः । ॐ अचिन्त्याय नमः । ॐ अनुग्रहप्रदाय नमः । ॐ आदित्यसुताय नमः । ॐ आत्मरूपिणे नमः । ॐ आयुष्यदाय नमः । ॐ आनन्ददाय नमः । ॐ आदिभूताय नमः । ॐ आदिदेवाय नमः । ॐ आत्मविद्याविशारदाय नमः । ॐ आदरनीयाय नमः । ॐ आधिव्याधिहराय नमः । ॐ आत्मसंयमकारकाय नमः ।
शनि नामों का महत्व
अघहराय – पापों का नाश करने वाले। अभयप्रदाय – भय को दूर कर साहस प्रदान करने वाले। अन्नदात्रे – जीवन का पोषण करने वाले। अशेषदुरितापहाय – समस्त कष्टों और दोषों का नाश करने वाले। अर्कनन्दनाय – सूर्यदेव के प्रिय पुत्र। अभीष्टफलदाय – मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले। अखिलदोषघ्नाय – सभी प्रकार के दोषों का निवारण करने वाले। इन नामों के माध्यम से भक्त शनिदेव के विभिन्न दिव्य स्वरूपों का ध्यान करता है और अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है।
पाठ करने की विधि
शनिवार प्रातः या सूर्यास्त के बाद स्नान करें। शनि देव के चित्र या मूर्ति के सामने तिल के तेल का दीपक जलाएँ। काले तिल, उड़द और नीले पुष्प अर्पित करें। एकाग्र मन से सहस्रनामावली का जप करें। जप के बाद शनि स्तुति, शनि चालीसा या शनि मंत्र का पाठ करें। अंत में समस्त प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना करें।
लाभ
शनि दोष एवं साढ़ेसाती के प्रभाव को शांत करने में सहायक माना जाता है। मानसिक तनाव और भय कम करने में सहायता मिलती है। धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ता है। कर्मों के प्रति जागरूकता आती है। आध्यात्मिक उन्नति एवं आत्मबल की प्राप्ति होती है।
निष्कर्ष
श्री शनैश्चर सहस्रनामावली शनिदेव की महिमा का अद्भुत स्तोत्र है। इसके प्रत्येक नाम में दिव्य शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा समाहित मानी गई है। श्रद्धा, विश्वास और नियमितता के साथ इन नामों का जप करने से जीवन में संतुलन, धैर्य, न्यायप्रियता और आत्मबल की वृद्धि होती है। शनिदेव अपने भक्तों को कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं और उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। ॥ जय जय श्री शनिदेव महाराज ॥ यह सामग्री मौलिक शैली में तैयार की गई है और वेबसाइट उपयोग के लिए कॉपीराइट-फ्री रूपांतरण है।
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Frequently Asked Questions
श्री शनैश्चर सहस्रनामावली क्या है?
श्री शनैश्चर सहस्रनामावली शनिदेव के एक हजार पवित्र नामों का संग्रह है। इन नामों के माध्यम से शनिदेव के विभिन्न स्वरूपों, गुणों, शक्तियों और दिव्य महिमा का वर्णन किया जाता है। इसका पाठ भक्तों को शनिदेव के प्रति श्रद्धा और भक्ति विकसित करने में सहायता करता है।
श्री शनैश्चर सहस्रनामावली का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
शनिवार के दिन प्रातःकाल या सूर्यास्त के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शनिदेव की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक सहस्रनामावली का पाठ करें। पाठ के दौरान मन को एकाग्र रखकर शनिदेव का ध्यान करना शुभ माना जाता है।
श्री शनैश्चर सहस्रनामावली के पाठ से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सहस्रनामावली का नियमित पाठ शनिदेव की कृपा प्राप्त करने, मानसिक शांति बढ़ाने, आत्मबल मजबूत करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। यह साधक में धैर्य, अनुशासन, कर्मनिष्ठा और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास भी करता है।