यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ
<p><strong>“यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ, मत पूछो कहाँ-कहाँ है संतोषी माँ”</strong> माँ संतोषी की महिमा, करुणा और सर्वव्यापी स्वरूप का वर्णन करने वाला एक लोकप्रिय भक्तिमय भजन है। इस भजन में माँ संतोषी को ऐसी दयामयी और चमत्कारी देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो अपने भक्तों के दुःखों को दूर करती हैं, उनकी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि प्रदान करती हैं।</p><p>भजन के शब्द बताते हैं कि माँ संतोषी केवल किसी एक स्थान पर नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि में विद्यमान हैं। उनकी कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और भक्तों के जीवन की बाधाएँ दूर हो जाती हैं। भजन में माँ की शक्ति, दया, उदारता और भक्तवत्सल स्वभाव का सुंदर वर्णन किया गया है।</p><p>यह भजन विशेष रूप से <strong>शुक्रवार की पूजा, संतोषी माता व्रत, भजन संध्या, सत्संग और धार्मिक आयोजनों</strong> में गाया जाता है। इसके मधुर शब्द और भक्तिपूर्ण भाव श्रद्धालुओं के मन में माँ संतोषी के प्रति विश्वास, आशा और भक्ति को और अधिक मजबूत बनाते हैं।</p>