सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची
<p><strong>“सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची”</strong> भगवान गणेश जी की अत्यंत प्रसिद्ध और पारंपरिक आरती है, जिसे <strong>“गणपति आरती”</strong> भी कहा जाता है। यह भजन महाराष्ट्र और पूरे भारत में गणेश पूजा, गणेश चतुर्थी, आरती और कीर्तन के समय बड़े श्रद्धा भाव से गाया जाता है।</p><p>इस आरती में भगवान गणेश को <strong>सुख देने वाले, दुख दूर करने वाले और सभी विघ्नों का नाश करने वाले</strong> देवता के रूप में वर्णित किया गया है। इसमें उनके दिव्य स्वरूप, अलंकार, आभूषण, करुणा और भक्तों पर कृपा का सुंदर वर्णन मिलता है। साथ ही यह भी बताया गया है कि उनके दर्शन मात्र से मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।</p><p>यह भजन भक्तों में श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और गणपति बप्पा की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।</p><h2><br></h2>