प्रभु तेरी शरण
<p><strong>"प्रभु तेरी शरण, प्रभु तेरी शरण, प्रभु तेरी शरण मैं आया हूँ"</strong> एक अत्यंत भावपूर्ण और आत्मसमर्पण से ओत-प्रोत भजन है। इस भजन में भक्त अपने जीवन की कठिनाइयों, मोह-माया, कर्मों के बंधन और संसार के भ्रमों से थककर भगवान की शरण में आता है। वह स्वीकार करता है कि अपनी शक्ति से वह जीवन-सागर को पार नहीं कर सकता, इसलिए प्रभु के चरणों में आश्रय मांगता है।</p><p>यह भजन पूर्ण समर्पण, विनम्रता, पश्चाताप और ईश्वर पर अटूट विश्वास का संदेश देता है। इसमें भक्त अपने जीवन की वास्तविक स्थिति को समझते हुए भगवान से कृपा और उद्धार की प्रार्थना करता है।</p>
Frequently Asked Questions
इस भजन का मुख्य संदेश है कि संसार के दुखों, मोह और भ्रम से मुक्ति पाने के लिए भगवान की शरण ग्रहण करनी चाहिए।
"भवजल" या "भवसागर" संसार रूपी समुद्र को कहा जाता है, जिसमें मनुष्य जन्म-मरण और कर्मों के बंधनों के कारण भटकता रहता है।
माया जाल से तात्पर्य संसार के मोह, लोभ, अहंकार और भौतिक आकर्षणों से है, जो मनुष्य को ईश्वर से दूर कर देते हैं।