मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की

    मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की

    <p><br></p><p><strong>“मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की”</strong> माँ संतोषी की स्तुति और आराधना में गाया जाने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय भक्तिमय भजन है। इस भजन में भक्त माँ संतोषी के प्रति अपनी श्रद्धा, प्रेम और भक्ति व्यक्त करते हुए उनकी आरती उतारता है तथा उनकी करुणा, ममता और चमत्कारी कृपा का गुणगान करता है।</p><p>भजन के शब्द माँ संतोषी को एक दयालु और प्रेममयी माता के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिनकी कृपा से भक्तों के दुःख दूर होते हैं और उनके जीवन में सुख, शांति तथा संतोष का संचार होता है। इसमें माँ के मंदिर के दिव्य वातावरण, भक्ति-भाव और उनके आशीर्वादों की महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है।</p><p>यह भजन विशेष रूप से <strong>संतोषी माता की पूजा, शुक्रवार के व्रत, आरती, भजन संध्या और सत्संग</strong> के दौरान गाया जाता है। इसके मधुर बोल और भक्तिपूर्ण भाव श्रद्धालुओं के मन में माँ के प्रति प्रेम और विश्वास को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं।</p>

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