किया ना तूने हरि से प्यार
"किया ना तूने हरि से प्यार, सारा जीवन दिया यूँही गुजार" एक गहन आध्यात्मिक और चिंतनशील भजन है जो मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य का स्मरण कराता है। यह भजन आत्मनिरीक्षण करने और यह समझने की प्रेरणा देता है कि मानव जीवन केवल सांसारिक सुखों, मोह-माया और भौतिक उपलब्धियों के लिए नहीं मिला है, बल्कि ईश्वर की भक्ति, सद्कर्म और आत्मिक उन्नति के लिए भी मिला है।
भजन में मनुष्य की उस भूल की ओर संकेत किया गया है, जिसमें वह पूरा जीवन धन, प्रतिष्ठा और सांसारिक इच्छाओं के पीछे बिताता है, लेकिन ईश्वर का स्मरण और भक्ति करना भूल जाता है। यह भजन जागृति का संदेश देता है और बताता है कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।
यह रचना संतों की शिक्षाओं पर आधारित है और भक्त को भगवान के प्रति प्रेम, भक्ति तथा सदाचार अपनाने के लिए प्रेरित करती है।