श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में
<p><strong>“श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में”</strong> भगवान <strong>हनुमान जी</strong> की अटूट भक्ति, प्रेम और समर्पण को दर्शाने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय भजन है। यह भजन उस प्रसिद्ध प्रसंग पर आधारित है जिसमें हनुमान जी अपने हृदय को चीरकर दिखाते हैं कि उनके हृदय में भगवान श्रीराम और माता सीता सदा विराजमान हैं।</p><p>भजन में विभीषण के प्रश्न का उत्तर देते हुए हनुमान जी बताते हैं कि उनके लिए संसार की कोई वस्तु भगवान राम के बिना मूल्यवान नहीं है। उनका जीवन, आनंद और अस्तित्व केवल श्रीराम और माता जानकी की भक्ति में ही समर्पित है।</p><p>यह भजन सच्ची भक्ति, निस्वार्थ प्रेम और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। इसे <strong>हनुमान जयंती, राम नवमी, सुंदरकांड पाठ, राम भजन संध्या और धार्मिक आयोजनों</strong> में विशेष श्रद्धा के साथ गाया जाता है। </p>